अमरूद को गमले में उगाने की पूरी जानकारी

   


नमस्कार दोस्तो।
बागवानी एक बहुत ही अच्छा शौक है। बागवानी करने से हमारे मन को प्रसन्नता शांति और सुकून मिलता है साथ ही साथ घर सुंदर दिखता है पर्यावरण को लाभ होता हैै। हमें खाने के लिए ताजी सब्जियां और ताजे फल मिल जाते हैं। इसी क्रम में आप में से बहुत सारे लोग घर पर अपने बगीचों में फलदार पौधे भी उगाते हैं। जैसे नींबू ,आम,अमरूद , चीकू, अनन्नास  आदि सभी तरह के फलदार पौधे आजकल सभी लोग अपने बगीचे में उगा रहे हैं । आज हम बात करने वाले हैं गमले में लगे अमरूद की देखभाल कैसे करें ? जिससे उस पर ज्यादा फल आए अच्छे फल आए और उनका साइज़ भी बड़ा हो।
अमरूद को उगाने के लिए सही मौसम -
भारत में फलदार पौधों को उगाने का सही समय मार्च से लेकर जून जुलाई का महीना है सामान्यतः तीखी सर्दियां और तीखी गर्मियों को छोड़कर आप कभी भी फलदार पौधे उगा सकते हैं। अमरुद को ऊगाने का सही समय जुलाई का महीना है। इस समय उत्तर भारत में मानसून आ जाता है और भरपूर बारिश होती है ।अगर आप बारिश के समय अमरुद के पौधे को लगाएंगे तो यह बड़ी आसानी से लग जाएगा और आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। मार्च में अमरुद उगाने पर गर्मियों के मौसम में पौधे की ज्यादा देखभाल करने की जरूरत होती है। इसलिए आप बरसात के मौसम में ही फलदार पौधे लगाने की कोशिश करें। 







अमरूद की कौनसी वैरायटी अच्छी है -
गमले में अमरूद उगाने के लिए अमरूद की सबसे अच्छी वैरायटी थाई वैरायटी या इजराइली अमरूद है। यह दोनों ही वेराइटी के अमरुद बहुत जल्दी गमले में फल देने लगते हैं और फल का साइज भी काफी बड़ा होता है। आजकल सीडलेस अमरुद भी आ गया है। जिसके अंदर बीज नहीं होते और खाने में उसका बहुत ही अच्छा स्वाद होता है आप जब भी गमले में अमरूद लगाएं तो कम से कम दो-तीन गमलों में पौधे लगाएं जिससे आपके परिवार के लिए भरपूर मात्रा में अमरुद आपको मिल सके।
अमरूद उगाने के लिए गमले का साइज -
फलदार पौधों में अमरुद एक बहुत ही अच्छा पौधा है। सामान्यतः अमरुद को जमीन में वाला चाहिए लेकिन अगर आप इसे गमले में वह आना चाहते हैं। तो इसके लिए आपके पास कम से कम 20 इंच या उससे बड़े साइज का गमला होना चाहिए 20 दिन से बड़े गमले में ही अमरुद आपको अच्छे तरीके से फल दे पाएगा और उस पर लगने वाले फल का साइज भी बड़ा होगा और स्वादिष्ट भी होगा इसके लिए आप प्लास्टिक के किसी बड़े ड्रम का प्रयोग कर सकते हैं या फिर सीमेंट का बड़ा सा गमला बनवा सकते हैं।





अमरूद के लिए सही मिट्टी - 
गमले में कैसे भी फलदार पौधे के उचित विकास के लिए सही मिट्टी होना काफी आवश्यक है। अगर आप गमले में अमरूद उगाना चाहते हैं तो मिट्टी अच्छी उरवर्क होनी चाहिए। इसके लिए आप अपन गार्डन से मिट्टी ले सकते हैं और उसमें गोबर खाद मिलाकर उसकी उर्वरकता बड़ा सकते हैं।

सामान्य मिट्टी - 70%
गोबर खाद - 30%

मिट्टी और खाद को अच्छे से मिलाकर मिश्रण तैयार करें।
इस तैयार मिट्टी के मिश्रण को एक दिन सूरज की तेज धूप में सुखा लें जिससे मिट्टी के अंदर जितने भी कीड़े है वह खत्म हो जाए और मिट्टी रिचार्ज हो जाए।

गमले में अमरूद लगाने की तैयारी -
गमले में अमरूद उगाने के लिए जून जुलाई के महीने का चुनाव करें।जब आपके यहां एक बार मानसूनी बारिश हो जाए इसके बाद आप गमले में अमरूद का पौधा लगा सकते हैं। सबसे पहले एक बड़े साइज का गमला लेकर आएं और उसके नीचे जो पानी निकलने के लिए छेद होते हैं उन्हें सही कर ले अगर वह छेद बंद है तो उन्हें खोलें और उसके बाद उस छेद के ऊपर कंकर या ईट का टुकड़ा रखें उसके बाद ही गमले में मिट्टी भरें।

  शाम के समय पौधा लगाना अच्छा रहता है। आधा गमला मिट्टी भरने के बाद अमरूद के पौधे को मिट्टी में लगा दें। फिर भरपूर पानी दें एक दो दिन गमले को तेज धूप से बचाकर रखें। मौसम के हिसाब से पौधे में पानी दें। तीन से चार दिन बाद ही पानी देना चाहिए। शुरू में अगर आप लगातार पानी देगें तो अमरूद का पौधा सड़कर मर जायेगा।





अमरूद पर फल आने का समय - 

अमरूद वर्ष में दो बार फल देता है। एक बारिश के मौसम में और एक बार सर्दियों के मौसम में फल देता है।
उत्तर भारत में बरसात के मौसम में अच्छी फसल आती है। लेकिन बरसात में अमरूद के फलों में कीड़े पड़ जाती है। सर्दियों के समय अमरूद पर आने वाला फल मीठा होता है।

अमरूद के लिए अच्छी खाद -
अमरूद के पौधे पर अच्छे बड़े फल आएं इसके लिए अमरूद के पौधे में समय से खाद देना काफी जरूरी है। साल में दो बार पौधे पर फूल आने से पहले गोबर या कंपोस्ट खाद देना जरूरी है। गमले में लगे अमरूद के पौधे में 300-700 ग्राम गोबर खाद एक बार में दी जा सकती है। 
अमरूद के पौधे पर आने वाली बीमारियां 

अमरूद एक फलदार पौधा है । फूल फल आतें ही अमरूद पर बीमारियों का प्रकोप शुरू हो जाता है।

उखटा रोग - अमरुद के पौधे का रोग एक प्रमुख रोग है इस रोग में अमरुद के पौधे का ऊपरी भाग पीला पढ़कर सूखना शुरू हो जाता है और कुछ समय बाद का पूरा पौधा सूख जाता है। ज्यादा नमी युक्त जगह पर इस रोग का ज्यादा प्रकोप होता है इसरो के प्रकोप होने पर पौधे को जड़ से उखाड़ कर कहीं दूर ले जाकर जला देना चाहिए ।





तना कैंसर रोग - तना कैंसर रोग अमरूद के कम उम्र के पौधों पर लगने वाली बीमारी है यह कवक जनित बीमारी होती है इस रोग में अमरूद के पौधे की पत्तियों पर धब्बे पड़ना शुरू होते हैं और बाद में वह शाखा सूखने लगती हैं इस रोग के होने पर रोग ग्रसित शाखाओं को काट देना चाहिए और कटे हुए भाग पर ग्रीस लगाकर छोड़ दें।
फल गलन रोग - इस रोग में अमरूद के फलों पर गलन आना शुरू हो जाती है। फलों पर धब्बे, चकत्ते बनने लगते हैं और आखिर में फल सड़ जाते है। फलों पर काली ,सफेद फफूंद आने लगती है।

उपचार - मुख्य था इस रोक को फैलाने में फल मक्खी का बहुत बड़ा योगदान होता है फल मक्खी के उपचार के लिए कुछ उपाय हम आपको बता रहे हैं उनका प्रयोग आपको करना चाहिए।

1-  शक्कर 100 ग्राम को एक लीटर पानी के घोल में 10 मिलीलीटर मैलाथियॉन 50 ई सी मिलाकर  तैयार कर 50 से 100 मिलीलीटर प्रति मिट्टी के प्याले में डालकर जगह जगह पेडों पर टांग देवें ।इससे फल मक्खी की रोकथाम हो जाती है।

2- मिथाईल यूजिनल ट्रेप (100 मिलीलीटर मिश्रण में 0.1 प्रतिशत मिथाइल यूजिनोल व 0.1 प्रतिशत मेलाथियान) पेडों पर 5 से 6 फीट ऊँचाई पर लगायें| एक हेक्टर क्षेत्र में 10 ट्रेप पर्याप्त होते हैं| ट्रेप के मिश्रण को प्रति सप्ताह बदल दें| फल मक्खी को ट्रेप से विशेष प्रकार की आकर्षित करने वाली गंध आती है| इसको कली से फल बनने के समय पर ही बगीचों में उचित दूरी पर लगा देना चाहिए|






अमरूद को गमले में उगाने की पूरी जानकारी अमरूद को गमले में उगाने की पूरी जानकारी Reviewed by homegardennet.com on जून 13, 2021 Rating: 5

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